भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और लोकतंत्र में जनता मालिक होती है। और ये ललित निबंधिये शब्द बचपन से सुनता आया हु लेकिन बचपन से आज तक मैंने कभी जनता को मालिक बने देखा नही और किसी सरकारी बाबू को जनता का सेवक बना देखा नही ।
मै जिस घटना के बारे में आज लिख रहा हूँ वो ये है की घटना 22 अप्रैल 2015 की है जिस दिन एक RTI की अपील की सुनवाई का दिनाँक निर्धारित था राजस्थन सचिवालय के सामन्य परसासन्न विभाग के प्रमुख शासन सचिव के यहाँ और समय भी निर्धारित था 3.30PM बजे और मै पहुँच गया प्रमुख सचिव अजित कुमार सिंह के निजी सचिव के पास उन्होने कहा की अभी 3.24 pm हुआ है साहब को निर्धारित समय पे ही फ़ोन कर बोलूंगा हमने कहा कोई बात नही जब 3.30 PM पे निजी सचिव ने प्रमुख सचिव से बात की और बताया की साहब करौली के SDM और सवाईमाधोपुर के DM के साथ मीटिंग कर रहे है आप 4.15PM में आओ मैंने कहा इस पत्र पे लिख दो की 3.30 PM से 4.15PM समय कर दिया गया है वो अजीब से घूरते हुये बोला आपको तो जल्दी समय मिल गया लोग सुबह से इंतजार कर रहे है मैंने कहा की मैं खुद नही आया हु मुझे आपने 10 दिन पहले पत्र लिख कर बुलाया है और आपने ही समय दिया है। फिर मैं उनके ऑफिस से निकल सचिवालय के कैंपस में घूमते हुए पेड के निचे बैठ गया और इन्तजार करने लगा तभी एक पुलिस आया की मुख्य सचिव आने वाले है आप यहाँ से जाये वो नाराज होंगे मैंने कहा क्यों नाराज होंगे हम इस तेज धुप में कहा जाये कोई जगह भी इन्तजार करने का नही है। फिर वो माना और मै फिर 4.15 PM में पहुँच प्रमुख सचिव सामन्य परसासन विभाग के निजी सचिव के पास गया वो फिर फ़ोन किया और बात करने के बाद बोला अभी और इन्तजार करना होगा मैंने पूछा कितना वो बोले ये नही बता सकता मैंने कहा कोई अनिश्चित समय तक मैं इंतजार नही कर सकता वो नाराज हो गया और बोला यहाँ तो साहब जब चाहेंगे तब ही मिल सकते है मैंने कहा उन्होंने ही समय निर्धारित किया है तब मैं आया हु वो निजी सचिव अजीब नुगाहो से घूरते हुए एक आदमी के तरफ इसारे करते हुए बोला ये सुबह से इन्तजार कर रहे और आप इतने मे परेसान हो गए मैंने कहा मै कितना इन्तजार करु आप ये भी तो नही बता रहे है फिर उसने साहब को फोन किया और बोलता है की ये बोल रहे है की मै इन्तजार नही करूँगा फिर फ़ोन रख के बोला साहब ने बोला है आप जा सकते है मैंने कहा आप इस पत्र पे यही बात लिख दो वो बोलता है की पहली बार इस ऑफिस में ऐसे कोई बात कर रहा है मैंने कहा क्यों आप ये अपेछा रखते हो की जनता आपके सामने गिड़गिड़ाते रहे ? आप के कोई गुलाम थोड़े न है जो आपने हमें बोला वो आप लिख दो बात खत्म होगयी । तब तक 5PM बज गए थे तभी एक आदमी आया मीटिंग खत्म हो गया फिर हम अजित कुमार सिंह के पास पहुचे और उन्होने हमसे पूछा की बताओ क्यों अपील लगाई है हमने बता दिया फिर बोले ठीक है जाओ हम उठकर आ गए।
लेकिन हम आपको बता देकी किसी भी मीटिंग में उपस्थिति के लिए अनिवार्य रूप से सभी मीटिंग में मौजूद लोगो की हस्तकछर के साथ उस मीटिंग में क्या हुआ वो लिखना जरुरी होता है और उस मीटिंग का निर्णय क्या रहा वो भी लेकिन वो कुछ नही हुआ और वो भी एक IAS अधिकारी के मीटिंग में ये सब कुछ हुआ जिनकी आयु देख कर लग रही थी कुछ समय में वो सेवानिर्वित हो जायेगे।
मैंने 21 अप्रैल 2015 को दैनिक भास्कर के पहले पेज पे छपा अमेरिकी कंसल्टेंट का ब्लॉग पढ़ा जिसमे ये लिखा था की "भारत में जो जितना इन्तजार करवाये वो उतना बड़ा VIP" वो राजस्थान सरकार के साथ ही 6 महीने कार्य करके अमेरिका लोटा है वो भारत और राजस्थान की छवि क्या दुनिया भर में बनी होगी ? विदेशी निवेसक क्या केवल 5 स्टार एक्टिविस्ट की वजह से ही हमारे देश में निवेस करने से हिचक रहे है या इस परकार के अधिकारी के वजह से? जो खुद समय देकर लंबे समय तक इंतजार करवाते है और मिलकर भी केवल खाना पूर्ति करते है।
मैंने अपने ब्लॉग का शिर्सक दिया है की " अब समय आ गया है सामन्तवादी सरकारी तंत्र से लड़ने का " वो इसलिए ये सरकारी कर्मचारी शूरू से ही इनका व्योहार् राजा की तरह रहा है और हम लोगो ने कभी इनको इसके लिए चुनोती नही दिया है जिससे ये लोगों का मनोबल बढ़ा है अब जरुरत है ऐसे लोगो की लिखित में शिकायत करने की इसी लिए मैंने प्रमुख शासन सचिव सामान्य परसासं विभाग और उनके निजी सचिव दोनों की शिकायत मुख्यमंत्री से करने की जिससे ऐसे अधिकारियो के खिलाफ भले उसपे कार्यवाई होगी नही होगी अलग बात है लेकिन एक से ज्यादा शिकायत एक अधिकारी के बारे में मिलने लगेंगे तो सरकार के लिए भी ऐसे अधिकारी को बचना मुश्किल होगा क्योकि एक शिकायत दो शिकायत को आधारहीन बताया जा सकता है 10, 20 शिकायत को एक अधिकारी के खिलाफ शिकायत को आधारहीन बताना बहुत मुश्किल इसलिए ऐसे अधिकारी की शिकायत करनी चाहीये ।
इसलिए जो लोग भी ऐसा मानते है मेरी तरह की सरकारी तंत्र ख़राब है सही काम नही करता है तो अपनी भी कुछ जिमेदारी बनती है उनके खिलाफ लिखित में शिकायत करे और शिकायत करते समय ये नही सोचे की एक आदमी के शिकायत करने से क्या होगा।आप आपनी जिमेदारी निभाए दुआरे देर सबेर अपने आप आजायेंगे। इसी बात के साथ सामंतवादी सरकारी तंत्र के खिलाफ लड़ाई की शुरुवात करे।
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