मुझे कई लोग लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद कहने लगे कि अब तो मोदी जी आ गये अब आम आदमी पार्टी का क्या काम अब ये करेंगे न और अब तो पूरे देश में मोदी लहर है फिर ये बातें कुछ और तेजी से कहने लगे जब से दिल्ली में विधान सभा भंग की गयी है और चुनावों होने वाले हैं तो मैं ये बताने के लिए आपको थोडा अतीत में ले जाना चाहूंगा कि आम आदमी पार्टी बनी ही क्यों और इसकी क्या जरुरत है दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में ? एक जनलोकपाल का आन्दोलन चला अन्ना के नेतृत्वो में बड़ा लोगो का जन समर्थन मिला क्योंकि यह कानून काफी सालों से विचाराधीन था जिसे पास करवाने के लिए आन्दोलन करना पड़ा जिससे में भी शुरुवाती दिनों से जुड़ा फिर सरकार ने जॉइंट कमिटी बनाई लेकिन इस जॉइंट कमिटी में सिविल सोसाईटी की महत्वपूर्ण बातो को नही माना गया उसके बाद फिर अन्ना ने अनशन किया। फिर संसद ने तीन बातो का वादा किया कि हम इसे लोकपाल में शामिल करेगे लेकिन फिर संसद में किये बातो को नही माना गया तो तीसरी बार अनशन लोकपाल के लिए हुआ लेकिन तिसरी बार अंसशन अन्ना ने नही अरविन्न्द केजरीवाल ने किया। बाद में इस अंसशन में अन्ना भी शामिल हुए लेकिन सरकार ने कोई सुध नही ली इन आन्दोलनकारियो की। तब ये सोचने को आन्दोलनकारी मजबूर हुए की आखिर ये सरकार भराषटाचार रोकने वाली कानून क्यों लाने को तैयार नही है तब पता चला सभी पार्टी के काफी मात्रा में सांसद विधायक के ऊपर गंभीर आरोप है फिर ये सांसद ऐसा कानून क्यों बनायेगे जिससे वही सबसे पहले प्रभावित हो। तब तक मीडिया में ये बात भी उठने लगी की ये लोग चुनाव लड़ के क्यों नही आते तब अन्ना ने मंच से अनशन खत्म करने और राजनितिक विकल्प देने को बात कही जिसे बाद में अन्ना अलग हो गये और अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में ईमानदार राजनितिक विकल्प देश के सामने 26 नंबर 2012 को रखा गया क्योंकी लोकपाल के आन्दोलन से ये समझ आया की जबतक देश की राजनीति शुद्ध नही होगी तब तक व्यवस्था परिवर्तन नही किया जा सकता।
अभी तक देश को ईमानदार विकल्प नही मिला इसलिए ज्यादा कुछ हो नही पाया देश के विकास में। आशा के अनुरूप आम आदमी पार्टी के गठन के समय कुछ बेहद खास नियम पार्टी में बनाये गये, जिससे ये पार्टी भी उन पार्टी की तरह न हो जाये जो जय प्रकाश नारायण के आन्दोलन के बाद उभरी, जिसमे सबसे महत्वपूर्ण नियम यह था कि पार्टी किसी भी दागी को टिकट नही देगी, सारे चुनावी चन्दे का विवरण पार्टी की साईट पर होगा। एक ही परिवार के दो सदस्य को टिकट या पार्टी में पद नही दिए जाएंगे, टिकट किसे मिलेगा यह वहां की जनता तय करेगी। किसको टिकट दिया जा रहा है उसकी लिस्ट भी वेबसाइट पर डालेंगे, अगर उसके खिलाफ किसी के पास सबूत है तो दे, ऐसी सारी बातो का पार्टी बनाते हुए ध्यान रखा गया। जिससे बेईमानी का आगमन पार्टी में न हो और उस बात पर खरे भी उतरे। सबसे पहला चुनाव दिल्ली में हुआ और उसमे पार्टी ने अपने सारे उसूल पर खरे उतरे साफ छवि वाले लोगों को टिकट दिया। यहां तक दिल्ली में चुनाव लड़ रहे एक प्रत्याशी ने टिकट मांगते समय यह छुपाया कि उसके खिलाफ एक पारिवारिक मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है और उसका पता मतदान के कुछ दिन पहले लगा, और पार्टी ने उनका टिकट वापस लिया और पार्टी दिल्ली की 70 में से 69 सीट पर ही लड़ी। उसके बाद काफी अच्छे परिणाम आये लेकिन बहुमत से चूक गये। फिर पार्टी ने कहा कि हम सरकार नही बनायेगे लेकिन कांग्रेस ने अपनी गन्दी राजनैतिक चाल चली और उपराज्यपाल को सीधा आम आदमी के समर्थन का पत्र भेज दिया फिर इस बात का पार्टी पर दबाव हो गया कि आप सरकार बनाये और चुनावी वादा निभाए। फिर पार्टी ने 18 मुद्दों पर समर्थन की बात कही उस समय कांग्रेस ने कहा कि हम सहमत हैं। फिर आप पार्टी ने जनता में जनमत करवाया और जनता ने कहा सरकार बनावो और फिर सरकार बनी और पहली ऐसी सरकार बनी जिसने जितने वादे किये वो सारे निभाते हुए 49 दिन में जनलोकपाल का वादा पूरा नही कर पाने पर नैतिकता के उच्च मापदंड रखते हुए अरविन्द केजरीवाल की सरकार ने इस्तीफा दे दिया। जो अब तक के देश के राजनीती में वो होता आया था कि लोग सता के लिए संसद में नोट तक लहराये गए। झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के सांसदों को खरीदने के आरोप लगे एक समय में दो मुख्यमंत्री एक राज्य (UP) में हुए जब खनन माफिया के साथ मिलकर लोगो ने सरकार बनाई लेकिन अरविन्द केजरीवाल ने अपने वादे न पूरे कर पाने की वजह से इस्तीफा दे दिया वो भी 49 दिन में। आज वही लोग मोदी सरकार को पाँच महीने बाद भी कहते है की अभी बहुत जल्दी है उनको समय देना चाहिये लेकिन अरविन्द केजरीवाल पर ये बात लागू नही हो तो उन्होंने लगभग सारे चुनावी वादे 49 दिन में पूरा करते हुए जनलोकपाल नही पास कर पाने उन्होंने इस्तीफा दे दिया अब उनको लोग भगोड़ा कह रहे है लेकिन जिनको विरोध करना है वो तो कहेंगे, क्योकि अगर जन लोकपाल अरविन्द पास नही करा पाते और सत्ता में बने रहते यही लोग कहते की आप सत्तालोभी हो जन लोकपाल नही पास करा पाए तो सत्ता क्यों नही छोडी। कुछ लोग अफवाह उड़ाते है कि अरविन्द केजरीवाल ने प्रधानमंत्री बनने के लिए दिल्ली की गद्दी छोडी लेकिन वो नही बता पाते की मोदी जब मुख्यमंत्री होते हुए प्रधानमंत्री हो सकते है फिर अरविन्द केजरीवाल को क्या परेशानी थी। तो ये सब गुमराह करने की साजिश लगती है। एक नई पार्टी जिसके किसी भी नेता का कोई राजनैतिक अनुभव नहीं था, उन लोगो ने 2014 का चुनाव लड़ा और 400 सीट पर लड़ा और कहीं कोई दागी उमीदवार नहीं खड़े किए, जाति को ध्यान में रखकर टिकट किसी को नही दिया गया, किसी उम्मीदवार ने प्रचार में बेहिसाब पैसा खर्च नहीं किया, क्योंकि इन सब से ही भ्रष्टाचार उत्पन होता है और ये ही एक मात्र पार्टी है जो भ्रष्टाचार के प्रति गंभीर है। कोई भी योजना ईमानदारी से लागू नही की जा सकती है जब तक भ्रष्टाचार है । सवाल है कि क्या वर्तमान सरकार कोई भी ऐसा फैसला कर रही है या आगे फैसले लेने के संकेत दे रही है जिससे आम आदमी को राहत मिले सके। इस सरकार में क्या सरकारी स्कूल में गुणवता के साथ शिक्षा मिल सकेगी इसकी कोई योजना दिखती है? क्या सरकारी अस्पताल में अच्छी चिकित्सा मिल सकेगी। लेकिन लगता नही क्योंकि सभवत: देश का सबसे बड़ा अस्पताल एम्स में चल रहे भरष्टाचार पर पिछले दो साल से कारवाई करने वाले अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को हटा दिया और हटाने के लिए लगातार दबाव बना रहे बीजेपी नेता को आज मंत्री बना दिया तो लगता नही ये सरकार गंभीर है। देश में जब तक न्यायिक बदलाव नहीं होगा तब तक देश में अपराधियों को तय समय में सजा नही दी जा सकती लेकिन इस पर वर्तमान सरकार गंभीर नही है । पुलिस में बदलाव किये बिना अपराध पर काबू नही किया जा सकता। सरकारी स्कूल में गुणवता की शिक्षा के बिना सभी देशवासियों को शिक्षित नही बनाया जा सकता। ये सरकार इन सब मुद्दों पर खरी नहीं उतरती। इन सबकी बात आम आदमी पार्टी करती है। वर्तमान सरकार में वो इंस्पेक्टर राज खत्म किया जिससे देश का उद्योगपति परेशान था, शायद उन्होंने चुनावी चन्दा दिया था। लेकिन आम आदमी के सरोकार का कार्य तो वही पार्टी करेगी जो आम आदमी के चंदे से चुनाव लड़ेगी। इसलिए आम आदमी पार्टी की जरुरत इस देश को है इस देश में गरीब लोगो की संख्या ज्यादा है, खुद सरकार मानती है देश में 70 करोड़ को खाद्यान सुरक्षा की जरुरत है। फिर तो देश को आम आदमी पार्टी की जरुरत है। क्योकि असली भगोड़ा तो वो है जो पिछले 65 साल से बारी बारी से सत्ता में रहे और हर बार यही कहते रहे कि गरीबी भ्रष्टाचार मिटायेगे, क्या मिटाया इन लोगो ने। तो असली भगोड़े ये हैं जो वादा कर के नही निभाते, इसलिए आम आदमी पार्टी की जरूरत इस देश को है, क्योंकि इस देश के सभी नागरिकों को एक समान शिक्षा ,एक समान चिकित्सा,एक समान न्याय चाहिए, कोई VIP तंत्र नही ।
अभी तक देश को ईमानदार विकल्प नही मिला इसलिए ज्यादा कुछ हो नही पाया देश के विकास में। आशा के अनुरूप आम आदमी पार्टी के गठन के समय कुछ बेहद खास नियम पार्टी में बनाये गये, जिससे ये पार्टी भी उन पार्टी की तरह न हो जाये जो जय प्रकाश नारायण के आन्दोलन के बाद उभरी, जिसमे सबसे महत्वपूर्ण नियम यह था कि पार्टी किसी भी दागी को टिकट नही देगी, सारे चुनावी चन्दे का विवरण पार्टी की साईट पर होगा। एक ही परिवार के दो सदस्य को टिकट या पार्टी में पद नही दिए जाएंगे, टिकट किसे मिलेगा यह वहां की जनता तय करेगी। किसको टिकट दिया जा रहा है उसकी लिस्ट भी वेबसाइट पर डालेंगे, अगर उसके खिलाफ किसी के पास सबूत है तो दे, ऐसी सारी बातो का पार्टी बनाते हुए ध्यान रखा गया। जिससे बेईमानी का आगमन पार्टी में न हो और उस बात पर खरे भी उतरे। सबसे पहला चुनाव दिल्ली में हुआ और उसमे पार्टी ने अपने सारे उसूल पर खरे उतरे साफ छवि वाले लोगों को टिकट दिया। यहां तक दिल्ली में चुनाव लड़ रहे एक प्रत्याशी ने टिकट मांगते समय यह छुपाया कि उसके खिलाफ एक पारिवारिक मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है और उसका पता मतदान के कुछ दिन पहले लगा, और पार्टी ने उनका टिकट वापस लिया और पार्टी दिल्ली की 70 में से 69 सीट पर ही लड़ी। उसके बाद काफी अच्छे परिणाम आये लेकिन बहुमत से चूक गये। फिर पार्टी ने कहा कि हम सरकार नही बनायेगे लेकिन कांग्रेस ने अपनी गन्दी राजनैतिक चाल चली और उपराज्यपाल को सीधा आम आदमी के समर्थन का पत्र भेज दिया फिर इस बात का पार्टी पर दबाव हो गया कि आप सरकार बनाये और चुनावी वादा निभाए। फिर पार्टी ने 18 मुद्दों पर समर्थन की बात कही उस समय कांग्रेस ने कहा कि हम सहमत हैं। फिर आप पार्टी ने जनता में जनमत करवाया और जनता ने कहा सरकार बनावो और फिर सरकार बनी और पहली ऐसी सरकार बनी जिसने जितने वादे किये वो सारे निभाते हुए 49 दिन में जनलोकपाल का वादा पूरा नही कर पाने पर नैतिकता के उच्च मापदंड रखते हुए अरविन्द केजरीवाल की सरकार ने इस्तीफा दे दिया। जो अब तक के देश के राजनीती में वो होता आया था कि लोग सता के लिए संसद में नोट तक लहराये गए। झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के सांसदों को खरीदने के आरोप लगे एक समय में दो मुख्यमंत्री एक राज्य (UP) में हुए जब खनन माफिया के साथ मिलकर लोगो ने सरकार बनाई लेकिन अरविन्द केजरीवाल ने अपने वादे न पूरे कर पाने की वजह से इस्तीफा दे दिया वो भी 49 दिन में। आज वही लोग मोदी सरकार को पाँच महीने बाद भी कहते है की अभी बहुत जल्दी है उनको समय देना चाहिये लेकिन अरविन्द केजरीवाल पर ये बात लागू नही हो तो उन्होंने लगभग सारे चुनावी वादे 49 दिन में पूरा करते हुए जनलोकपाल नही पास कर पाने उन्होंने इस्तीफा दे दिया अब उनको लोग भगोड़ा कह रहे है लेकिन जिनको विरोध करना है वो तो कहेंगे, क्योकि अगर जन लोकपाल अरविन्द पास नही करा पाते और सत्ता में बने रहते यही लोग कहते की आप सत्तालोभी हो जन लोकपाल नही पास करा पाए तो सत्ता क्यों नही छोडी। कुछ लोग अफवाह उड़ाते है कि अरविन्द केजरीवाल ने प्रधानमंत्री बनने के लिए दिल्ली की गद्दी छोडी लेकिन वो नही बता पाते की मोदी जब मुख्यमंत्री होते हुए प्रधानमंत्री हो सकते है फिर अरविन्द केजरीवाल को क्या परेशानी थी। तो ये सब गुमराह करने की साजिश लगती है। एक नई पार्टी जिसके किसी भी नेता का कोई राजनैतिक अनुभव नहीं था, उन लोगो ने 2014 का चुनाव लड़ा और 400 सीट पर लड़ा और कहीं कोई दागी उमीदवार नहीं खड़े किए, जाति को ध्यान में रखकर टिकट किसी को नही दिया गया, किसी उम्मीदवार ने प्रचार में बेहिसाब पैसा खर्च नहीं किया, क्योंकि इन सब से ही भ्रष्टाचार उत्पन होता है और ये ही एक मात्र पार्टी है जो भ्रष्टाचार के प्रति गंभीर है। कोई भी योजना ईमानदारी से लागू नही की जा सकती है जब तक भ्रष्टाचार है । सवाल है कि क्या वर्तमान सरकार कोई भी ऐसा फैसला कर रही है या आगे फैसले लेने के संकेत दे रही है जिससे आम आदमी को राहत मिले सके। इस सरकार में क्या सरकारी स्कूल में गुणवता के साथ शिक्षा मिल सकेगी इसकी कोई योजना दिखती है? क्या सरकारी अस्पताल में अच्छी चिकित्सा मिल सकेगी। लेकिन लगता नही क्योंकि सभवत: देश का सबसे बड़ा अस्पताल एम्स में चल रहे भरष्टाचार पर पिछले दो साल से कारवाई करने वाले अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को हटा दिया और हटाने के लिए लगातार दबाव बना रहे बीजेपी नेता को आज मंत्री बना दिया तो लगता नही ये सरकार गंभीर है। देश में जब तक न्यायिक बदलाव नहीं होगा तब तक देश में अपराधियों को तय समय में सजा नही दी जा सकती लेकिन इस पर वर्तमान सरकार गंभीर नही है । पुलिस में बदलाव किये बिना अपराध पर काबू नही किया जा सकता। सरकारी स्कूल में गुणवता की शिक्षा के बिना सभी देशवासियों को शिक्षित नही बनाया जा सकता। ये सरकार इन सब मुद्दों पर खरी नहीं उतरती। इन सबकी बात आम आदमी पार्टी करती है। वर्तमान सरकार में वो इंस्पेक्टर राज खत्म किया जिससे देश का उद्योगपति परेशान था, शायद उन्होंने चुनावी चन्दा दिया था। लेकिन आम आदमी के सरोकार का कार्य तो वही पार्टी करेगी जो आम आदमी के चंदे से चुनाव लड़ेगी। इसलिए आम आदमी पार्टी की जरुरत इस देश को है इस देश में गरीब लोगो की संख्या ज्यादा है, खुद सरकार मानती है देश में 70 करोड़ को खाद्यान सुरक्षा की जरुरत है। फिर तो देश को आम आदमी पार्टी की जरुरत है। क्योकि असली भगोड़ा तो वो है जो पिछले 65 साल से बारी बारी से सत्ता में रहे और हर बार यही कहते रहे कि गरीबी भ्रष्टाचार मिटायेगे, क्या मिटाया इन लोगो ने। तो असली भगोड़े ये हैं जो वादा कर के नही निभाते, इसलिए आम आदमी पार्टी की जरूरत इस देश को है, क्योंकि इस देश के सभी नागरिकों को एक समान शिक्षा ,एक समान चिकित्सा,एक समान न्याय चाहिए, कोई VIP तंत्र नही ।

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